
मोदी सरकार अपने सबसे साहसिक फैसले ‘नोटबंदी’ को चुनावी महाभारत से दूर रखेगी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि जनता के बीच नोटबंदी को लेकर वो धारणा नहीं बन सकी, जिसकी पार्टी को उम्मीद थी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भाषणों से नोटबंदी का मुद्दा लगभग नदारद हो चुका है। मंत्री भी इसके जिक्र से परहेज कर रहे हैं। यहां तक कि 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के जवाब में प्रधानमंत्री ने 1.33 घंटे के भाषण में उपलब्धियां गिनाईं, पर नोटबंदी का जिक्र तक नहीं किया।
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