बर्लिन हिंद-प्रशांत इलाके में चीनी ड्रैगन पर नकेल कसने के लिए जर्मनी ने भी कमर कस ली है। जर्मन सेना के अधिकारी अब ऑस्ट्रेलिया की नौसेना के साथ तैनात होंगे और एक जर्मन नेवी का युद्धपोत हिंद महासागर में गश्त लगाएगा। इस कदम के जरिए जर्मनी इंडो-पैसफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करने पर काम करेगा। जर्मनी की विदेश मंत्री अन्नग्रेट क्रांप ने कहा कि दुनिया की भलाई के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। अन्नग्रेट ने कहा, 'हमारा मानना है कि जर्मनी को इस क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ानी होगी।' AKK के नाम से मशहूर अन्नग्रेट ने कहा कि यूरोप चीन के आर्थिक अजेंडे और भूराजनीतिक रणनीति से पिछले साल पूरी तरह से वाफिक हो गया है। चीन जर्मनी का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार है और हमारा चीन के साथ मजबूत आर्थिक संबंध है जो दोनों ही देशों के हित में है।' चीन के खिलाफ दुनिया में कई मोर्चे खुले जर्मन रक्षा मंत्री ने कहा कि इसी समय हम असमान निवेश शर्तों, बौद्धिक संपदा अधिकार का आक्रामक स्वायत्तीकरण आदि से हम आंखें नहीं चुरा सकते हैं। बता दें कि अन्नग्रेट को एक समय में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल का उत्तराधिकारी माना जाता था। हालांकि उन्होंने ऐलान किया है कि वह वर्ष 2021 में चुनाव नहीं लड़ेंगी। साथ ही पार्टी का नेतृत्व भी छोड़ेंगी। अन्नग्रेट पहली ऐसी जर्मन नेता हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि जर्मनी के 5G नेटवर्क से चीन की कंपनी हुवावे को अलग रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यूरोप के देश उसी तकनीक को अपनाएंगे जिस पर वे भरोसा करते हैं। ऑस्ट्रेलिया पहला ऐसा पश्चिमी देश था जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता के आधार पर वर्ष 2018 में हुवावे पर बैन लगाया था। इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाया।
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