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Friday, 13 November 2020

न्यूट्रीनो की खोज करने वाले जापान के नोबेल विजेता कोशिबा का निधन

(इंट्रो में सुधार के साथ) तोक्यो, 13 नवंबर (एपी) सूक्ष्म कण न्यूट्रीनों की मौजूदगी को साबित करने के लिए 2002 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार के सह विजेता जापान के खगोल भौतिकविद् मासातोशी कोशिबा का निधन हो गया। वह 94 साल के थे। तोक्यो विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसर कोशिबा का बृहस्पतिवार को तोक्यो के एक अस्पताल में निधन हो गया। विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को इस बारे में बताया। मौत के कारणों के बारे में नहीं बताया गया है। कोशिबा ने सूर्य से निकलने वाली न्यूट्रीनो किरणों को लेकर परीक्षण के लिए विशालकाय भूमिगत कक्ष तैयार किया था। कोशिबा को दो अन्य वैज्ञानिकों - पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के रेमंड डेविस जूनियर और इटली के वैज्ञानिक रिकॉर्डों गियाकोनी के साथ यह पुरस्कार मिला था। कोशिबा मध्य जापान में पहाड़ियों के बीच बनाए गए कामिओकांदे न्यूट्रीनो डिटेक्टर में काम करते थे। उन्होंने न्यूट्रीनो की मौजूदगी की पुष्टि की और डेविस के काम को आगे बढ़ाया और ब्रह्मांड में सुपरनोवा विस्फोट से निकलने वाले न्यूट्रीनो कणों का भी पता लगाया। उनकी खोज के कारण आगे कई और आविष्कार हुए। कोशिबा के ही छात्र ताकाकी कजिता को 2015 में भौतिकी के क्षेत्र में पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने अध्ययन में न्यूट्रीनो के द्रव्यमान का पता लगाया। एपी आशीष पवनेशपवनेश शाहिदशाहिद


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न्यूट्रीनों की खोज करने वाले जापान के नोबेल विजेता कोशिबा का निधन

टोक्यो, 13 नवंबर (एपी) सूक्ष्म कण न्यूट्रीनों की मौजूदगी को साबित करने के लिए 2002 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार के सह विजेता जापान के खगोल विज्ञानी मासातोशी कोशिबा का निधन हो गया। वह 94 साल के थे। टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसर कोशिबा का बृहस्पतिवार को टोक्यो के एक अस्पताल में निधन हो गया। विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को इस बारे में बताया। मौत के कारणों के बारे में नहीं बताया गया है। कोशिबा ने सूर्य से निकलने वाली किरणों न्यूट्रीनों को लेकर परीक्षण के लिए विशालकाय भूमिगत कक्ष तैयार किया था। कोशिबा को दो अन्य वैज्ञानिकों - पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के रेमंड डेविस जूनियर और इटली के वैज्ञानिक रिकॉर्डों गियाकोनी के साथ यह पुरस्कार मिला था। कोशिबा मध्य जापान में पहाड़ियों के बीच बनाए गए कामिओकांडे न्यूट्रीनो डिटेक्टर में काम करते थे। उन्होंने न्यूट्रीनों की मौजूदगी की पुष्टि की और डेविस के काम को आगे बढ़ाया और ब्रह्मांड में सुपरनोवा विस्फोट से निकलने वाले न्यूट्रीनों कणों का भी पता लगाया। उनकी खोज के कारण आगे कई और आविष्कार हुए। कोशिबा के ही छात्र ताकाकी कजिता को 2015 में भौतिकी के क्षेत्र में पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने अध्ययन में न्यूट्रीनों के द्रव्यमान का पता लगाया। एपी आशीष पवनेशपवनेश


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Thursday, 12 November 2020

Ladakh Standoff: लद्दाख में चीन की दादागिरी के खिलाफ भारत के साथ अमेरिका, पर रूस में क्यों चिंता?

मास्‍को/वॉशिंगटन पूर्वी लद्दाख में भारतीय सरजमीं पर नजरें गड़ाए बैठे चीनी ड्रैगन के खिलाफ भारत और अमेरिका साथ आते दिख रहे हैं। चीन पर नकेल कसने के लिए भारत ने अमेरिका के साथ कई बेहद अहम रक्षा समझौतों को अंजाम दिया है। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती दोस्‍ती से रूस की टेंशन बढ़ती जा रही है। गुरुवार को रूस ने इशारों ही इशारों में कहा कि लद्दाख तनाव का गलत इस्‍तेमाल अमेरिका अपने भू-राजनीतिक उद्देश्‍यों के लिए कर सकता है। आइए जानते हैं कि रूस भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग से क्‍यों चिंतित है.... भारत में रूस के उप मिशन प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने शुक्रवार को कहा, ‘यह स्पष्ट है कि वैश्विक उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता है तो इसका असर हमारे साझा घर यूरेशिया क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा। इस गतिरोध का जिसे हम देख रहे हैं, उसका दुरुपयोग अन्य ताकतों की ओर से अपने भू-राजनीतिक उद्देश्‍यों के लिए किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘हम मानते हैं कि हमारे दोनों मित्र एशियाई देशों को और अधिक सकारात्मक संवाद के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।' रूस और अमेरिका दोनों ही बढ़त बनाना चाहते हैं रोमन ने कहा कि उनका देश भारत और चीन के बीच तनाव से 'स्‍वाभाविक रूप से चिंतित' है और दोनों ही एशियाई पड़ोसी देशों के लिए यह बेहद महत्‍वपूर्ण है कि वे और ज्‍यादा रचनात्‍मक बातचीत में शामिल हों। दरअसल, पूर्वी लद्दाख में चल रहे तनाव के जरिए रूस और अमेरिका दोनों ही बढ़त बनाना चाहते हैं और इसकी वजह से दोनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। रूस में पिछले दिनों हुई बातचीत के बाद भारत और चीन के बीच तनाव को कम करने पर आपसी सहमति बनी है। रूसी विदेश मंत्री के हस्‍तक्षेप के बाद भी चीन अभी भी पूर्वी लद्दाख में पीछे हटने को तैयार होता नहीं दिख रहा है। भारत और चीन के हजारों सैनिक और घातक हथियार कड़ाके की ठंड के बाद भी पूर्वी लद्दाख में तैनात हैं। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के नेतृत्‍व में अमेरिका चीन को सबक सिखाने के लिए भारत, जापान और ऑ‍स्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर 'क्‍वॉड' को मजबूत करने में जुट गया है। यही नहीं रूस के सबसे बड़े शस्‍त्र बाजार भारत को अमेरिका अत्‍याधुनिक हथियार दे रहा है। क्‍वॉड से रूस को सता रहा बड़ा डर अमेर‍िका के इस तरफा हमले से रूस की टेंशन बढ़ गई है। रूस को डर सता रहा है कि अगर भारत क्‍वॉड के जरिए अमेरिकी खेमे में गया तो उसकी मुसीबत काफी बढ़ जाएगी, वहीं अमेरिका का प्रभाव एशिया में काफी बढ़ जाएगा। यही नहीं भारत के बाजार से सफाया होने के बाद रूसी अर्थव्‍यवस्‍था भी संकट में आ जाएगी। इसी वजह से रूस शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्‍स की बैठक के जरिए दोनों ही सदस्‍य देशों भारत और चीन के बीच तनाव को घटाने में जुट गया है। भारत को जल्द S-400 मिसाइल सौंपेगा रूस चीन के साथ तनाव के बीच रूस ने भारत को दिए जाने वाले S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को जल्दी से जल्दी मुहैया करने का आश्वासन दिया है। एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली रक्षा प्रणाली दुनिया में सबसे उन्नत सिस्टम में से एक है। मध्यम से लंबी दूरी तक, इसका रडार 400 किलोमीटर (249 मील) की सीमा तक आने वाले विमानों को स्पॉट और ट्रैक कर सकता है और लक्ष्य पर कई मिसाइलों से हमला कर सकता है।


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Wednesday, 11 November 2020

मुंबई जैसे आतंकी हमले के बाद ऑस्ट्रिया का जोरदार ऐक्‍शन, 'राजनीतिक इस्‍लाम' के प्रसार को बनाएगा अपराध

वियना वियना में मुंबई की तरह से आतंकी हमले के बाद ऑस्ट्रिया की सरकार ने 'राजनीतिक इस्‍लाम' के खिलाफ जोरदार ऐक्‍शन शुरू कर द‍िया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज की सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कई सख्‍त कदम उठाने पर सहमति जताई। इन प्रस्‍तावों में आतंकी मामलों में दोषी पाए गए लोगों को आजीवन जेल में रखना और उन पर इलेक्‍ट्रानिक निगरानी रखना शामिल है। के प्रसार को अपराध माना जाएगा। ऑस्ट्रिया की सरकार धार्मिक रूप से प्रेरित राजनीतिक अतिवाद को अपराध बनाने जा रही है। कुर्ज ने कहा कि इन कदमों को दिसंबर में संसद के समक्ष वोट के लिए रखा जाएगा। इसके तहत ऑस्ट्रिया आतंकी हमले रोकने के लिए दोतरफा कार्रवाई करने जा रहा है। पहला संदिग्‍ध आतंकियों को निशाना बनाना और उस विचारधारा पर भी हमला बोला जो उन्‍हें हिंसा के लिए प्रेरित करती है। 2 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले में 4 लोगों की मौत कुर्ज ने कहा, 'हम राजनीतिक इस्‍लाम को एक राजनीतिक अपराध घोषित करेंगे ताकि उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके जो आतंकवादी नहीं हैं लेकिन उनके लिए नर्सरी तैयार करते हैं।' इससे पहले 2 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले में 4 लोगों की मौत हो गई थी और इस कार्रवाई में आतंकी की भी मौत हो गई थी। इस हमले में एक पुलिसवाले समेत 20 अन्‍य लोग घायल हो गए थे। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में मुंबई जैसे हमले को अंजाम देने वाला आतंकवादी सीरिया जाकर कुख्‍यात आतंकवादी संगठन ISIS में शामिल होना चाहता था। हालांक‍ि हमला करने में अक्षम होने की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाया। इस हमलावर की पहचान कुजतिम फेजजुलाई के रूप में हुई है। हाल ही में इस 20 साल के आतंकवादी को उसकी कम उम्र को देखते हुए जेल से रिहा किया गया था।


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मोजांबिक में 50 लोगों के गला काटने पर भड़के फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति, इस्‍लाम‍िक आतंकवाद को बताया खतरा

पेरिस अफ्रीकी देश में मोजांबिक में 50 लोगों की गला काटकर हत्‍या करने से भड़के फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रां ने 'इस्‍लामिक आतंकवाद' के बढ़ते खतरे के प्रति दुनियाभर को आगाह किया है। फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने कहा, 'इस्‍लामि‍क आतंकवाद एक अंतरराष्‍ट्रीय खतरा है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय जवाब की जरूरत है।' मैक्रां ने ट्वीट करके कहा, 'मोजांबिक 50 से ज्‍यादा लोगों की गला काटकर हत्‍या कर दी गई, महिलाओं का अपहरण कर लिया गया, गांवों को लूट लिया गया और उसमें आग लगा दी गई।' उन्‍होंने कहा, 'जंगली लोगों ने एक शांति के धर्म का अपहरण कर लिया ताकि आतंक के बीज को बोया जा सके। इस्‍लामिक आतंकवाद एक अंतरराष्‍ट्रीय खतरा है और इसके खिलाफ अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिक्रिया की जरूरत है।' 50 लोगों को मौत के घाट उतार दिया बता दें कि मोजांबिक में सीरिया से भागकर आए आईएसआईएस के आतंकी कहर बरपा रहे हैं। सरकारी सेनाओं के मैदान छोड़कर भागने के कारण यह आतंकी संगठन पूरे देश में तेजी से पांव पसार रहा है। डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआईएस के आतंकियों ने एक फुटबाल के मैदान में फरमान न मानने वाले 50 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं, इसके बाद आतंकियों ने उन लोगों के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए बीबीसी न्यूज की खबर के मुताबिक बंदूकधारियों ने गांव पर हमला करने के दौरान 'अल्लाह हू अकबर' के नारे लगाए। मोजांबिक के एक पुलिस चीफ ने द टाइम्स बताया कि हमलावरों ने घर जला दिए और फिर बचकर भागे लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इससे पहले वाले हफ्ते में कई गांवों पर हमला कर लूट-मार मचाई थी। एक घटना में दर्जनों आदमियों और लड़कों का संदिग्ध जिहादियों ने सिर काट दिया था। महिलाओं को बना रहा सेक्स स्लेव सीरिया से मारकर भगाए जाने के बाद आईएसआईएस के लड़ाके अब अफ्रीका पहुंच गए हैं। उन्होंने अफ्रीकी देश मोजाम्बिक के एक शहर को अपनी नई राजधानी घोषित किया है। वे यहां अपनी आय बढ़ाने के लिए कच्चे तेल के भंडारों पर कब्जा जमा रहे हैं। आईएसआईएस के इस देश में आने के बाद महिलाओं के अपहरण की वारदातों में भी अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी देखी गई है। कहा जा रहा है कि आईएस के लड़ाके महिलाओं का अपहरण कर उन्हें सेक्स स्लेव बना रहे हैं। सीरिया में भी इन आतंकियों ने यदीजी समुदाय की कई महिलाओं को सेक्स स्लेव बनाया हुआ था।


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पैगंबर कार्टून विवाद: अब जर्मनी में छात्र ने दी टीचर की सिर काटने की धमकी

बर्लिन जर्मनी के एक स्‍कूल में 11 साल के एक बच्‍चे ने अपनी ही टीचर की गला काटने की धमकी देकर सबको दहशत में डाल दिया। इस जर्मन बच्‍चे ने कहा कि पैगंबर मोहम्‍मद साहब का अपमान करने वाले व्‍यक्ति की हत्‍या करना जायज है। यह घटना उस समय हुई जब पिछले महीने फ्रांसीसी टीचर सैमुअल पैटी की हत्‍या की याद में जर्मनी के स्‍कूल में एक मिनट की शोक सभा का आयोजन किया गया था। इस बच्‍चे ने उस समय गला काटने की धमकी दी जब शिक्षकों ने चेतावनी दी थी कि यदि पैरंट्स अपने बच्‍चों के शिक्षकों के साथ मीटिंग करने में असफल रहते हैं तो उन्‍हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। जर्मन स्‍कूल में फ्रांसीसी शिक्षक की हत्‍या की याद में एक मिनट की शोक सभा का आयोजन किया गया था। इस दौरान मुस्लिम बच्‍चे ने धमकी दी, 'जो पैगंबर का अपमान करता है, उसकी हत्‍या करने की आपको अनुमति है। यह ठीक है।' 'मैं वैसा ही करूंगा जैसे पेरिस में बच्‍चे ने अपने टीचर के साथ किया' छात्र के इस धमकी के बाद जब स्‍कूल के हेडमास्‍टर ने बच्‍चे के पैरंट्स को अलर्ट करने के लिए बुलाया तो बच्‍चे की मां ने जोर देकर कहा कि उनका परिवार इस तरह की विचारधारा को नहीं मानता है। मां ने कहा कि निश्चित रूप से उनके बच्‍चे ने इस तरह के अतिवादी विचार को स्‍कूल में ही सीखा होगा। धमकी देने की यह घटना राजधानी बर्लिन के स्‍पान्‍दाउ इलाके में स्थित क्रिश्चियन मोर्गेनस्‍टर्न प्राइमरी स्‍कूल की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्‍कूल की टीचर ने पैरंट्स के साथ मीटिंग पर जोर दिया था। उन्‍होंने क्‍लास से कहा था कि यह बैठक महत्‍वपूर्ण है और इस दौरान समस्‍याओं को उठाया जाएगा। टीचर ने यह भी कहा था कि इस मीटिंग में जो भी हिस्‍सा नहीं लेगा, उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसके जवाब में बच्‍चे ने कहा, 'अगर मेरे पैरंट्स के नहीं आने पर ऐसा हुआ तो मैं वैसा ही करूंगा जैसे पेरिस में बच्‍चे ने अपने टीचर के साथ किया था।' पैटी ने लेक्‍चर के दौरान पैगंबर मोहम्‍मद साहब के कार्टून दिखाए जर्मन बच्‍चे का इशारा 18 साल के चेचेन मूल के बच्‍चे अब्‍दोउलाख अंजोरोव की ओर था। अंजोरोव ने ही 16 अक्‍टूबर को फ्रांसीसी टीचर पैटी की हत्‍या कर दी थी। पैटी ने फ्री स्‍पीच के एक लेक्‍चर के दौरान पैगंबर मोहम्‍मद साहब के विवादास्‍पद कार्टून दिखाए थे। इसके बाद पूरे मुस्लिम जगत में इसकी कड़ी आलोचना शुरू हो गई थी। फ्रांस के राष्‍ट्रपति ने पैटी की प्रशंसा की थी और उन्‍हें 'हीरो' करार दिया था।


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Tuesday, 10 November 2020

भारत की सख्ती देख नरम पड़ा चीन, SCO में जिनपिंग बोले- बातचीत से हल करेंगे विवाद

मॉस्को लद्दाख में जारी तनाव () के बीच भारत का सख्त रूख देख चीन के तेवर अब नरम पड़ने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को () के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में चीन के राष्ट्रपति () ने कहा कि एससीओ के देशों को अपने आपसी विवादों और मतभेदों को बातचीत और परामर्श के माध्यम से हल करने चाहिए। प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति में जिनपिंग ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन को आगे बढ़ाने और एकजुटता, सहयोग को गहरा करने के लिए सदस्य देशों को आगे आना चाहिए। सीमा विवाद के बीच पहली बार मिले पीएम मोदी और जिनपिंग मई से लद्दाख में शुरू हुए भारत चीन सीमा विवाद के बाद यह पहला ऐसा मौका था जब पीएम मोदी और शी जिनपिंग किसी बैठक में एक साथ शरीक हुए। हालांकि, इस बैठक से इतर दोनों देशों के बीच कोई अन्य बातचीत नहीं हुई। लद्दाख में तनाव कम करने के लिए भारत और चीन की सेनाओं के बीच सैन्य स्तर की 8 दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, अभी तक इन बैठकों का जमीन पर कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला है। कोरोना पर यह बोले जिनपिंग जिनपिंग ने एससीओ की बैठक में कहा कि हमें एकजुटता और आपसी विश्वास को गहरा करना चाहिए, और विवादों और मतभेदों को बातचीत और परामर्श के माध्यम से हल करना चाहिए, ताकि एससीओ विकास के लिए राजनीतिक नींव को मजबूत किया जा सके। कोरोना वायरस महामारी का जिक्र करते हुए जिनपिंग ने कहा कि इस महामारी ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में बदलाव ला दिया है। जिनपिंग ने सहयोग का किया आह्वान जिनपिंग ने भविष्य को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि कोरोना महामारी के कारण दुनिया अशांति और परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब बहुसंख्यकवाद और एकतरफावाद, खुलेपन और एकांत के बीच होने वाले विकल्पों का सामना कर रहा है। दुनिया भर में लोग एक बेहतर जीवन के लिए बढ़ रहे हैं। शांति, विकास, सहयोग और पारस्परिक लाभ की ओर बढ़ने से ही हमें जीत मिलेगी। पीएम मोदी ने इशारों इशारों में साधा निशाना इस बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा विवाद को लेकर चीन पर इशारों इशारों में निशाना साधा। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि एससीओ सदस्य देश एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें। भारत के शंघाई सहयोग संगठन देशों के साथ मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। भारत का मानना है कि कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए आगे बढ़ें।


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बाइडेन की जीत पर अबतक खामोश क्यों है तुर्की, कैसे हैं एर्दोगन और ट्रंप के संबंध

अंकारा अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में को मिली जीत पर तुर्की के राष्ट्रपति ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। 2016 में जब को राष्ट्रपति पद पर जीत मिली थी तब एर्दोगन ने न केवल उन्हें फोन कर बधाई दी थी, बल्कि ट्वीट कर भी खुशी का इजहार किया था। ठीक इसी तरह जब 2012 में बराक ओबामा ने जीत पाई थी तब भी एर्दोगन ने उन्हें तुरंत बधाई दी थी। ट्रंप के साथ नजदीकी के कारण नहीं दे रहे बधाई कहा जाता है कि यदि कोई राजनीतिक संरक्षण के लिए ट्रंप पर मोहम्मद बिन सलमान से ज्यादा निर्भर करता है तो वह तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन हैं। नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के सहयोगी होने के बाद भी तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा है। ऐसे में यूएस कांग्रेस ने तुर्की पर प्रतिबंध लगाए जाने की वकालत की थी, लेकिन ट्रंप ने इसे लागू करने से मना कर दिया था। सीरिया में ट्रंप ने की एर्दोगन की मदद अपने व्यक्तिगत संबंधों से ही एर्दोगन ने ट्रंप को सीरिया के कुर्द क्षेत्रों से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के लिए मनाया था ताकि तुर्की उन क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण कर सके। ट्रंप ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में पेंटागन या अमेरिकी सहयोगियों से सलाह किए बिना ही यह निर्णय लिया था। जबकि इसमें ब्रिटेन, फ्रांस और कुर्द लड़ाके भी शामिल थे। तुर्की के खिलाफ सख्त ऐक्शन ले सकते हैं बाइडेन जो बाइडेन ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ही साफ कर दिया था कि वे तुर्की को कोई भी रियायत देने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि राष्ट्रपति एर्दोगन चाहकर भी बाइडेन को जीत की बधाई नहीं दे पा रहे हैं। तुर्की के ऊपर न केवल कई चरमपंथी संगठनों को बढ़ावा देने का आरोप है, बल्कि वह नाटो का सदस्य होने के बावजूद रूस से भारी हथियार खरीद रहा है। ऐसे में बाइडेन उसे छोड़ने वाले नहीं हैं।


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Monday, 9 November 2020

आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच पुतिन ने कराया युद्धविराम, नागोर्नो-काराबाख में तैनात होंगे रूसी सैनिक

मॉस्को आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच 27 सितंबर से जारी युद्ध को रोकने के लिए रूस ने कोशिशें तेज कर दी हैं। राष्ट्रपति ने ऐलान किया है कि रूस के हस्तक्षेप से आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच शांति पर सहमति बन गई है। पुतिन ने यह भी कहा है कि युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए रूसी शांतिरक्षक बलों को इस इलाके में तैनाक किया जाएगा। विवादित क्षेत्र में तैनात होंगे रूसी शांतिरक्षक पुतिन ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इस समझौते से नागोर्नो-काराबाख इलाके में लंबे समय तक स्थायी और पूर्ण संघर्ष विराम की आवश्यक शर्तें स्थापित होंगी। आर्मीनिया और अजरबैजान ने भी इस शांति समझौते की पुष्टि की है। जिसके बाद माना जा रहा है कि 44 दिनों से जारी लड़ाई का अब अंत नजदीक है। आर्मीनिया और अजरबैजान ने की संधि की पुष्टि अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस पशिनयान ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि रूस की मध्यस्थता में उनका अजरबैजान के साथ शांति समझौता हुआ है। जिसके कुछ देर बाद अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भी इसकी पुष्टि की। नागोर्नो-कारबाख क्षेत्र के नेता अराईक हरुतुयन ने भी ऐलान किया है कि उन्होंने शांति के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। आर्मीनिया के पीएम बोले- हमने नहीं मानी है हार आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोलस ने कहा कि यह निर्णय युद्ध की स्थिति के गहन विश्लेषण और क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों के साथ चर्चा के आधार पर किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह जीत नहीं है लेकिन हार भी नहीं है, जब तक आप खुद को हारा हुआ नहीं मानते। हम खुद को कभी भी पराजित नहीं मानेंगे और यह हमारी राष्ट्रीय एकता और पुनर्जन्म के युग की एक नई शुरुआत होगी। अजरबैजान की सेना को युद्ध में बढ़त अजरबैजान की सेना ने तुर्की और इजरायली हथियारों के दम पर आर्मीनिया को भारी नुकसान पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार, नागोर्नो-काराबाख की राजधानी स्टेपानाकेर्ट पास बसे शुशी शहर पर अजरबैजानी सेना ने कब्जा कर लिया है। जिसके बाद से आर्मीनिया की सेना में स्टेपानाकेर्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्या है इस संघर्ष का इतिहास आर्मेनिया और अजरबैजान 1918 और 1921 के बीच आजाद हुए थे। आजादी के समय भी दोनों देशों में सीमा विवाद के कारण कोई खास मित्रता नहीं थी। पहले विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद इन दोनों देशों में से एक तीसरा हिस्सा Transcaucasian Federation अलग हो गया। जिसे अभी जार्जिया के रूप में जाना जाता है। 1922 में ये तीनों देश सोवियत यूनियन में शामिल हो गए। इस दौरान रूस के महान नेता जोसेफ स्टालिन ने अजरबैजान के एक हिस्से (नागोर्नो-काराबाख) को आर्मेनिया को दे दिया। यह हिस्सा पारंपरिक रूप से अजरबैजान के कब्जे में था लेकिन यहां रहने वाले लोग आर्मेनियाई मूल के थे।


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नागोर्नो-काराबाख की राजधानी तक पहुंची अजरबैजानी सेना, आर्मीनिया को भारी नुकसान

बाकू और के बीच 27 सितंबर से शुरू हुई लड़ाई अब भी जारी है। इस दौरान अजरबैजान की सेना ने तुर्की और इजरायली हथियारों के दम पर आर्मीनिया को भारी नुकसान पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार, की राजधानी स्टेपानाकेर्ट पास बसे शुशी शहर पर अजरबैजानी सेना ने कब्जा कर लिया है। जिसके बाद से आर्मीनिया की सेना में स्टेपानाकेर्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। तुर्की से सैन्य सहायता ले सकता है अजरबैजान उधर अजरबैजान के राष्ट्रपति राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने कहा है कि अगर आर्मीनिया से उन्हें हमले का खतरा बनता रहता है तो वह तुर्की से सैन्य सहायता को स्वीकार कर लेगें। माना जा रहा है कि अगर इस युद्ध में तुर्की की प्रत्यक्ष भागीदारी होती है तो इससे आर्मीनिया की स्थिति और खराब हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान हालात अच्छे हैं ऐसे में हमें तुर्की के सैन्य सहायता की अभी कोई जरूरत नहीं है। स्टेपानाकेर्ट पर क्लस्टर बमों से किया हमले का आरोप आर्मीनिया ने आरोप लगाया है कि अजरबैजान की सेना ने नागोर्नो-काराबाख की राजधानी स्टेपानाकेर्ट पर क्लस्टर बमों से हमला किया है। नागोर्नो-काराबाख की आपातकालीन सेवा ने कहा है कि अजरबैजान के इस हमले में उसका कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ है। बता दें कि दुनियाभर में क्लस्टर बमों के उपयोग पर पाबंदी है ऐसे में अगर कोई देश इस बम का उपयोग करता है तो उसे युद्धअपराध माना जाता है। शांति बहाली के लिए पुतिन ने एर्दोगन से की बात आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच जारी युद्ध को खत्म करवाने के लिए रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन से बात की है। दोनों देशों ने शांति की बहाली के लिए एक संयुक्त कार्यदल बनाने की घोषणा भी की है। पुतिन और एर्दोगन ने शनिवार को संकटग्रस्त क्षेत्र में स्थिति पर चर्चा की थी। 7 सितंबर से जारी है लड़ाई नगोर्नो-काराबाख इलाके में आर्मीनियाई मूल के लोग बहुसंख्यक हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे अजरबैजान का हिस्सा मानता है। सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही अजरबैजान इस इलाके पर कब्जे का प्रयास कर रहा है लेकिन उसे कभी भी कामयाबी नहीं मिली है। अपुष्ट खबरों के मुताबिक अभी तक अजरबैजान की सेना ने नगोर्नो-काराबाख के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया है। क्या है इस संघर्ष का इतिहास आर्मेनिया और अजरबैजान 1918 और 1921 के बीच आजाद हुए थे। आजादी के समय भी दोनों देशों में सीमा विवाद के कारण कोई खास मित्रता नहीं थी। पहले विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद इन दोनों देशों में से एक तीसरा हिस्सा Transcaucasian Federation अलग हो गया। जिसे अभी जार्जिया के रूप में जाना जाता है। 1922 में ये तीनों देश सोवियत यूनियन में शामिल हो गए। इस दौरान रूस के महान नेता जोसेफ स्टालिन ने अजरबैजान के एक हिस्से (नागोर्नो-काराबाख) को आर्मेनिया को दे दिया। यह हिस्सा पारंपरिक रूप से अजरबैजान के कब्जे में था लेकिन यहां रहने वाले लोग आर्मेनियाई मूल के थे।


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नागोर्नो-काराबाख की राजधानी तक पहुंची अजरबैजानी सेना, आर्मीनिया को भारी नुकसान

बाकू और के बीच 27 सितंबर से शुरू हुई लड़ाई अब भी जारी है। इस दौरान अजरबैजान की सेना ने तुर्की और इजरायली हथियारों के दम पर आर्मीनिया को भारी नुकसान पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार, की राजधानी स्टेपानाकेर्ट पास बसे शुशी शहर पर अजरबैजानी सेना ने कब्जा कर लिया है। जिसके बाद से आर्मीनिया की सेना में स्टेपानाकेर्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। तुर्की से सैन्य सहायता ले सकता है अजरबैजान उधर अजरबैजान के राष्ट्रपति राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने कहा है कि अगर आर्मीनिया से उन्हें हमले का खतरा बनता रहता है तो वह तुर्की से सैन्य सहायता को स्वीकार कर लेगें। माना जा रहा है कि अगर इस युद्ध में तुर्की की प्रत्यक्ष भागीदारी होती है तो इससे आर्मीनिया की स्थिति और खराब हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान हालात अच्छे हैं ऐसे में हमें तुर्की के सैन्य सहायता की अभी कोई जरूरत नहीं है। स्टेपानाकेर्ट पर क्लस्टर बमों से किया हमले का आरोप आर्मीनिया ने आरोप लगाया है कि अजरबैजान की सेना ने नागोर्नो-काराबाख की राजधानी स्टेपानाकेर्ट पर क्लस्टर बमों से हमला किया है। नागोर्नो-काराबाख की आपातकालीन सेवा ने कहा है कि अजरबैजान के इस हमले में उसका कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ है। बता दें कि दुनियाभर में क्लस्टर बमों के उपयोग पर पाबंदी है ऐसे में अगर कोई देश इस बम का उपयोग करता है तो उसे युद्धअपराध माना जाता है। शांति बहाली के लिए पुतिन ने एर्दोगन से की बात आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच जारी युद्ध को खत्म करवाने के लिए रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन से बात की है। दोनों देशों ने शांति की बहाली के लिए एक संयुक्त कार्यदल बनाने की घोषणा भी की है। पुतिन और एर्दोगन ने शनिवार को संकटग्रस्त क्षेत्र में स्थिति पर चर्चा की थी। 7 सितंबर से जारी है लड़ाई नगोर्नो-काराबाख इलाके में आर्मीनियाई मूल के लोग बहुसंख्यक हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे अजरबैजान का हिस्सा मानता है। सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही अजरबैजान इस इलाके पर कब्जे का प्रयास कर रहा है लेकिन उसे कभी भी कामयाबी नहीं मिली है। अपुष्ट खबरों के मुताबिक अभी तक अजरबैजान की सेना ने नगोर्नो-काराबाख के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया है। क्या है इस संघर्ष का इतिहास आर्मेनिया और अजरबैजान 1918 और 1921 के बीच आजाद हुए थे। आजादी के समय भी दोनों देशों में सीमा विवाद के कारण कोई खास मित्रता नहीं थी। पहले विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद इन दोनों देशों में से एक तीसरा हिस्सा Transcaucasian Federation अलग हो गया। जिसे अभी जार्जिया के रूप में जाना जाता है। 1922 में ये तीनों देश सोवियत यूनियन में शामिल हो गए। इस दौरान रूस के महान नेता जोसेफ स्टालिन ने अजरबैजान के एक हिस्से (नागोर्नो-काराबाख) को आर्मेनिया को दे दिया। यह हिस्सा पारंपरिक रूप से अजरबैजान के कब्जे में था लेकिन यहां रहने वाले लोग आर्मेनियाई मूल के थे।


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Saturday, 7 November 2020

एर्दोगन को फ्रांस-अमेरिका से पंगा लेना पड़ा भारी, तुर्की की मुद्रा 'लीरा' रिकॉर्ड निचले स्तर पर

अंकारा तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन का अमेरिका और फ्रांस के साथ पंगा लेना भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को तुर्की की मुद्रा डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर देखी गई। शनिवार को लीरा में मामूली सुधार दिखाई दिया, फिर भी एक डॉलर का मूल्य 8.52 लीरा के निचले स्तर पर बना रहा।गुस्साए एर्दोगन ने लीरा में रिकॉर्ड गिरावट और महंगाई दर के ऊंचाई पर बने रहने के बीच शनिवार को देश के केंद्रीय बैंक के प्रमुख को हटा दिया। पूर्व वित्त मंत्री केंद्रीय बैंक के नए प्रमुख तुर्की के आधिकारिक गजट में राष्ट्रपति के फैसले की घोषणा की गयी है। इसके मुताबिक केंद्रीय बैंक के प्रमुख मूरत उयसाल को हटा दिया गया है और उनके स्थान पर पूर्व वित्त मंत्री नासी अग्बल को लाया गया है। तुर्की की मुद्रा लीरा के साल की शुरुआत से अब तक अपने मूल्य का लगभग एक तिहाई गिर जाने के बाद राष्ट्रपति एर्दोआन ने यह निर्णय किया है। अमेरिकी पाबंदियों से तुर्की की अर्थव्यवस्था संकट में अमेरिका की पाबंदियों के कारण तुर्की की अर्थव्यवस्था इन दिनों संकट से गुजर रही है। सोमवार को ही आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अमेरिका की चेतावनी के बाद तुर्की की मुद्रा लीरा रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई। तुर्की अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य संगठन नाटो का हिस्सा है। उसने रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद की है। तुर्की ने इस प्रणाली का परीक्षण किया है, जिसके बाद अमेरिका ने तुर्की के ऊपर आर्थिक पाबंदियां लगाने की चेतावनी दी। लीबिया में चल रही जंग में फ्रांस और तुर्की आमने-सामने तुर्की के एडम शोध संस्‍थान में विश्‍लेषक सिनान उल्‍गेन का मानना है कि अपने इस बयान के जरिए एर्दोगान ने यह दिखाने की कोशिश की कि वह पूरी दुनिया में मुस्लिमों के अधिकारों के रक्षक हैं। उल्‍गेन ने कहा, 'कार्टून को लेकर चल रहा विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ रही प्रतिस्‍पर्द्धा का हिस्‍सा है। फ्रांस ने संयुक्‍त अरब अमीरात के साथ मिलकर एक रणनीतिक गठजोड़ बनाया है ताकि पश्चिम एशिया और उत्‍तरी अफ्रीका में राजनीतिक इस्‍लाम के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस्लाम को ढाल बना रहे एर्दोगन एर्दोगन धर्म और देशप्रेम की बातें लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए भी कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से तुर्की की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उसकी मुद्रा का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। देश में बेरोजगारी और महंगाई के आंकड़े रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। तुर्की में पहले भी विद्रोह हो चुका है, जिसको एर्दोगन ने सेना के दम पर कुचल दिया था। ऐसे में वह इन मुद्दों के सहारे लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दों पर केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।


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Thursday, 5 November 2020

इस्‍लामिक आतंकवादियों की नर्सरी बना फ्रांस, स‍िखा रहे अपने ही देश से नफरत: इमैनुअल मैक्रां

पेरिस फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रां ने चेतावनी दी है कि देश में कई जगहों पर 'आतंकवादियों की नर्सरी' चल रही है। मैक्रां ने दावा किया कि आतंकवादियों की नर्सरी में बच्‍चों को इस्‍लामिक तौर तरीकों से फ्रांसीसी मूल्‍यों के प्रति घृणा करना सिखाया जाता है। फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने 'इस्‍लामिक अलगाववाद' का मुद्दा ऐसे समय पर उठाया है जब पूरा देश पिछले दिनों हुए आतंकी हमलों से गुस्‍से में है। मैक्रां ने फाइनेंशियल टाइम्‍स को लिखे एक पत्र में कहा कि 'इस्‍लाम के विकृत रूप' के नाम पर नफरत फैलाने वाले बयानों से फ्रांस के शिक्षक सैमुअल पैटी की गला काटकर हत्‍या की गई। इस निर्मम हत्‍याकांड को अंजाम देने वाले चेचेनिया के नागरिक को बाद में पुलिस ने मार गिराया था। मैक्रां ने कहा कि मुस्लिम बच्‍चे ऑनलाइन कट्टरपंथी इस्‍लाम की शिक्षा के शिकार बन रहे हैं। इन बच्‍चों को देश के कानूनों नहीं मानने के लिए प्रेरित किया जाता है। 'फ्रांस में आतंकवादियों की नर्सरी चल रही' मैक्रां ने कहा, 'वर्ष 2015 में यह स्‍पष्‍ट हो गया और मैंने राष्‍ट्रपति बनने से पहले ही कहा था कि फ्रांस में आतंकवादियों की नर्सरी चल रही है।' उन्‍होंने कहा, 'कुछ जिलों और इंटरनेट पर कट्टर इस्‍लाम से जुड़े गुट हमारे बच्‍चों को देश से ही नफरत करना बता रहे हैं। उन्‍हें देश के कानूनों को नहीं मानने का आह्वान कर रहे हैं। अगर आप मेरे ऊपर भरोसा नहीं कर रहे हैं तो सोशल मीडिया पर किए जाने वाले नफरत भरे पोस्‍ट को पढ़‍िए जो इस्‍लाम के दूषित रूप में शेयर किए जा रहे हैं और जिसकी वजह से सैमुअल पैटी की हत्‍या की गई।' फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने कहा, 'उन छोटे जिलों की यात्रा करिए जहां पर तीन से चार साल की लड़कियां बुर्का पहनती हैं और उन्‍हें लड़कों से अलग रखा जाता है। थोड़ा सा जवान होने पर इन बच्‍चों को समाज से अलग करके रखा जाता है और फ्रांस के मूल्‍यों के प्रति नफरत करना सीखाया जाता है।' उन्‍होंने इस अवधारणा को खारिज कर दिया कि फ्रांस किसी एक खास धार्मिक समूह के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि यह जंग घृणा के खिलाफ है न कि इस्‍लाम के खिलाफ।


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रूस: 'गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्‍लादिमीर पुतिन, गर्लफ्रेंड के कहने पर दे सकते हैं इस्‍तीफा'

मास्‍को पिछले करीब 20 साल से रूस पर 'राज' कर रहे राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन अगले साल की शुरुआत में अपने पद से इस्‍तीफा दे सकते हैं। सूत्रों ने दावा किया है कि पुतिन से इस्‍तीफा देने की अपील उनकी गर्लफ्रेंड जिमनास्‍ट अलीना कबाइवा और उनकी दो बेटियों ने किया है। दावा किया जा रहा है कि पुतिन पार्किसंस बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल में आई तस्‍वीरों के बाद पुतिन के बीमारी की अटकलें और तेज हो गई हैं। मास्‍को के राजनीति विज्ञानी वलेरी सोलोवेई ने ब्रिटिश अखबार द सन से कहा कि रूसी राष्‍ट्रपति की गर्लफ्रेंड और उनकी दो बेटियां पुतिन को इस्‍तीफा देने के लिए जोर डाल रही हैं। उन्‍होंने कहा, 'पुतिन का एक परिवार है और उसका रूसी राष्‍ट्रपति पर गहरा प्रभाव है। पुतिन जनवरी में सत्‍ता किसी और को सौंप सकते हैं।' उन्‍होंने कहा कि संभवत: राष्‍ट्रपति पार्किसंस से जूझ रहे हैं और हालिया तस्‍वीरों में उनकी इस बीमारी के लक्षण दिखाई दिए हैं। आपराधिक कार्रवाई से पुतिन को आजीवन छूट पुतिन हाल ही में लगातार अपने पैर इधर से उधर करते देखे गए थे और द सन के विशेषज्ञों के मुताबिक रूसी राष्‍ट्रपति दर्द से पीड़‍ित थे। इस दौरान पुतिन ने एक हाथ में लिया था और विशेषज्ञों का दावा है कि इसमें दवाएं थीं। पुतिन के इस्‍तीफा देने की अटकलें ऐसे समय में तेज हो गई हैं जब रूसी सांसद एक विधेयक को लाने पर विचार कर रहे हैं जिसके तहत आपराधिक कार्रवाई से उन्‍हें आजीवन छूट मिल जाएगी। इस नए विधेयक को खुद पुतिन ने ही पेश किया था और इसके मुताबिक पुतिन के जिंदा रहने तक उन्‍हें कानूनी कार्रवाई से छूट रहेगी और राज्‍य की ओर से उन्‍हें सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। रूस के सरकारी चैनल आरटी के मुताबिक यह विधेयक रूस में सत्‍ता के हस्‍तांतर‍ण का संकेत है। ऐसा पहली बार नहीं है जब लोगों ने ऐसी अटकलें लगाई हैं कि पुतिन को पार्किंसन की बीमारी है। सोलोवेई ने कहा कि जल्‍द ही एक नया पीएम बनाया जाएगा और उसे पुतिन के संरक्षण में ट्रेनिंग दी जाएगी।


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Wednesday, 4 November 2020

ऑस्ट्रिया के चांसलर की चेतावनी, 'यूरोपीय जीवनशैली के लिए खतरा है राजनीतिक इस्‍लाम'

व‍ियना ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने चेतावनी दी है कि राजनीतिक इस्‍लाम यूरोप की जीवनशैली के लिए बड़ा खतरा बन गया है। कुर्ज ने यूरोपीय यूनियन से अपील की कि वियना आतंकी हमले से सबक लेते हुए अपने 'सहिष्‍णुता की गलतफहमी' को खत्‍म कर ले। उन्‍होंने यूरोपीय देखों का आह्वान किया कि वे और कड़ाई से राजनीतिक इस्‍लाम की समस्‍या से निपटने पर फोकस करें। कुर्ज ने कहा कि राजनीतिक इस्‍लाम की विचारधारा यूरोप की स्‍वतंत्रता और मूल्‍यों के लिए 'खतरनाक' है। ऑस्ट्रिया के चांसलर के ऑफिस ने बुधवार को कहा कि वह फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रां के साथ संपर्क में हैं ताकि आतंकवाद से मिलकर निपटने पर चर्चा की जा सके। जर्मनी के एक मीडिया संस्‍थान से बातचीत में कुर्ज ने कहा कि मैं आशा करता हूं कि हम इस सहिष्‍णुता की गलतफहमी का खात्‍मा देखेंगे। ऑस्ट्रिया के चांसलर कुर्ज ने कहा कि मैं यह भी आशा करता हूं कि यूरोप के सभी देश यह महसूस करेंगे कि राजनीतिक इस्‍लाम की विचारधारा हमारी स्‍वतंत्रता और यूरोपीय जीवनशैली के लिए कितना खतरनाक है। कुर्ज का बयान ऐसे समय पर आया है जब यह खुलासा हुआ है कि वियना के हमले को अंजाम देने वाला कुजतिम फेजजुलाई को अप्रैल 2019 में सीरिया जाकर आईएसआईएस में शामिल होने के प्रयास में जेल भेजा गया था। हालांकि कुजतिम को बाद में कम उम्र को देखते हुए रिहा कर दिया गया था। उस समय आतंकी ने दावा किया था कि उसे 'गलत मस्जिद' ने भटका दिया था। इसके बाद उसने कट्टरपंथ से दूर करने वाले काउंसलर्स से झूठा वादा किया कि उसने आईएसआईएस से तौबा कर लिया है। कुर्ज ने कुजतिम को छोड़ देने के फैसले 'निश्चित रूप से गलत' करार दिया। बता दें कि कुजतिम ने वियना में 6 जगहों पर गोली चलाकर 4 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। कुर्ज ने कहा कि अगर आतंकी को रिहा नहीं किया गया होता तो यह आतंकवादी हमला संभव नहीं था। वियना के आंतरिक मंत्री कार्ल नेहम्‍मर ने हमले के बाद कहा था कि बंदूकधारी की पहचान कुजतिम फेजजुलाई के रूप में हुई है। उसके पास ऑस्ट्रिया और नार्थ मेसोडोनिया दोनों की नागरिकता है। उन्‍होंने बताया कि कुजतिम फेजजुलाई ने आईएसआईएस में शामिल होने के लिए सीरिया जाने का प्रयास किया था और उसके बाद उसे अप्रैल 2019 में जेल भेज दिया गया था।


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Monday, 2 November 2020

पैगंबर कार्टून विवाद: 'कट्टर इस्‍लाम' के खिलाफ छेड़ी जंग, फ्रांसीसी मंत्री के बयान से बवाल

पेरिस पैगंबर मोहम्‍मद साहब के कार्टून विवाद के बीच फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रां के बाद उनके एक मंत्री के बयान से बवाल मच गया है। फ्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री गेराल्‍ड डरमानिन ने रविवार को एक अखबार को दिए साक्षात्‍कार में कहा क‍ि फ्रांस ने कट्टरपंथी इस्‍लाम के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। इससे पहले फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने कहा था कि 'इस्‍लाम संकट में है।' मैक्रों के इस बयान की मुस्लिम देशों ने कड़ी आलोचना की थी। मैक्रां ने दो अक्‍टूबर को 'इस्‍लामिक अलगाववाद' से निपटने के लिए अपनी योजना पेश की थी। उन्‍होंने कहा कि इस्‍लामिक अलगाववाद से निपटने के लिए संसद में एक बिल पेश किया जाएगा। इसमें मस्जिदों के वित्‍तपोषण की निगरानी और धार्मिक गुटों के स्‍कूलों और अन्‍य संगठनों की जांच की जांच की जाएगी। इस भाषण में उन्‍होंने कहा था कि इस्‍लाम विश्‍वभर में संकट में है। फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति के इस बयान के बाद पूरी दुनिया में उनका विरोध हो रहा है। अब रविवार को फ्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री गेराल्‍ड ने कहा कि उनके देश ने कट्टर इस्‍लाम के खिलाफ जंग छेड़ दी है। उन्‍होंने संसद में पेश किए जाने वाले बिल के बारे में और ज्‍यादा जानकारी दी। उन्‍होंने कहा, 'अगर किसी ने महिला डॉक्‍टर से इलाज करवाने से मना किया तो उसे 5 साल तक जेल में डाला जा सकता है और 75 हजार यूरो का जुर्माना लगाया जा सकता है।' फ्रांसीसी मंत्री के बयान से सोशल मीडिया में बवाल गेराल्‍ड ने कहा कि उन लोगों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाए जाएंगे जो अधिकारियों पर दबाव डालते हैं या जो शिक्षकों के पाठ को ग्रहण करने से इनकार करते हैं। फ्रांसीसी मंत्री के इस बयान से सोशल मीडिया में बवाल मच गया है। बड़ी संख्‍या में मुसलमान ट्वीट करके फ्रांसीसी मंत्री के इस बयान की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। यही नहीं मुस्लिम 5 साल की सजा और भारी जुर्माने पर भी सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने शनिवार को कहा था कि जो मुस्लिम पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर परेशान हैं, हम उनका सम्मान करते हैं लेकिन इस आधार पर हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता है। बता दें कि फ्रांस में पिछले दो हफ्ते में हुए हमलों के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पेरिस में एक स्कूल टीचर के बाद नीस के चर्च में तीन लोगों की हत्या कर दी गई और शनिवार को लियोन में एक पादरी को गोली मार दी गई। फ्रांस में दोगुने सैनिक तैनात मैक्रों ने देश भर में तैनात सैनिकों की संख्या दोगुनी कर दी है। खासकर स्कूलों और पूजास्थलों के पास सैनिकों कौ तैनात किया गया है। साथ ही दूसरे इस्लामिक उग्रवादी हमलों की चेतावनी भी दी गई है। पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद दुनियाभर के मुस्लिमों, खासकर मुस्लिम देशों का निशाना बने मैक्रों ने अल जजीरा को इंटरव्यू देकर सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि फ्रांस के मकसद को गलत समझा जा रहा है।


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वियना में भीषण आतंकवादी हमले में 7 लोगों की मौत, फरार आतंकी की तलाश के लिए ऐक्‍शन में पुलिस

व‍ियना ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में घातक राइफल से लैस आतंकवादियों ने सोमवार की रात 6 जगहों पर जमकर तांडव मचाया। स्‍थानीय मीडिया ने बताया कि अब तक इस हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है और कई घायल हैं। पुलिस के जवाबी हमले में एक संदिग्‍ध की मौत हो गई है। आतंकवादी हमले के बाद पुलिस ने भी जोरदार कार्रवाई शुरू की है। वियना में यह हमला कोरोना वायरस लॉकडॉउन के ठीक पहले हुआ है। पुलिस ने अभी एक संदिग्‍ध आतंकी को घेर रखा है। बताया जा रहा है कि पहला हमला स्‍थानीय समयानुसार रात करीब 8 बजे एक स‍िनेगॉग के पास हुआ। हमलावर घातक राइफल से लैस थे। बताया जा रहा है कि एक आतंकी अभी भी फरार चल रहा है और पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए पूरे शहर को घेर ल‍िया है। सीमा पर बहुत कड़ी जांच की जा रही है। यही नहीं बच्‍चों को मंगलवार को स्‍कूल नहीं आने के लिए कहा गया है। पुलिस ने बताया कि एक संदिग्‍ध हमलावर को मार ग‍िराया गया है। हालांकि उसके साथ दो आम नागरिक भी कार्रवाई में मारे गए। एक पुलिस अधिकारी को भी गोली लगी है और उसकी हालत गंभीर है। वियना के मेयर ने बताया कि माइकल लुडविग ने कहा कि 15 लोगों को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 7 लोगों की हालत गंभीर है। पुलिस ने बताया कि आतंकवादियों ने कुल 6 जगहों पर गोलीबारी की। स‍िनेगॉग के पास कम से कम 50 राउंड गोलियां चली ऑस्ट्रिया की मीडिया के मुताबिक स‍िनेगॉग के पास कम से कम 50 राउंड गोलियां चली हैं। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने इसे घृणित आतंकी हमला बताया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने कहा है कि हम अपने देश में कठिन वक्त का सामना कर रहे हैं। हमारी पुलिस इस घिनौने आतंकी हमले की साजिश रचने वालों को ढूंढ निकालेगी। आतंक के आगे हम कभी नहीं झुकेंगे और हम हर तरीके से यह लड़ाई लड़ेंगे। चांसलर का कहना है कि जहां एक ओर पुलिस एंटी टेरर ऑपरेशन में जुटी है, वहीं दूसरी ओर सेना को अहम इमारतों की सुरक्षा में लगाया गया है। विएना में लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों से दूर रहने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है। वियना के बाहर भी कई इलाकों में छापेमारी की जा रही है।


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अब ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आतंकी हमला, 1 की मौत, संदिग्ध हमलावर ढेर

वियना फ्रांस पर आतंकी हमले के बाद अब यूरोप के एक और देश में टेरर अटैक हुआ है। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में हुई फायरिंग में एक शख्स की मौत हो गई। इस हमले में कई लोग जख्मी हुए हैं। ऑस्ट्रिया के गृह मंत्रालय ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। बताया जा रहा है कि संदिग्ध हमलावर को जवाबी कार्रवाई में मार गिराया गया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने इसे घृणित आतंकी हमला बताया है। पुलिस का कहना है हमलावर ने गोलीबारी करते हुए एक शख्स की हत्या कर दी। फायरिंग की चपेट में आकर कई जख्मी हुए हैं, जिनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। वियना पुलिस ने ट्वीट करते हुए कहा है कि एक संदिग्ध हमलावर को पुलिस ने मार गिराया है। ऑस्ट्रिया के गृह मंत्री ने मीडिया को बताया कि हमलावरों के खिलाफ सुरक्षा बलों का ऑपरेशन अभी जारी है। वियना के मेयर माइकल लुडविग का कहना है कि 15 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से सात की हालत नाजुक है। वियना पुलिस का कहना है कि इस हमले को कई संदिग्ध हथियारबंद हमलावरों ने अंजाम दिया है। पुलिस के मुताबिक छह अलग-अलग जगहों से गोली चलने की जानकारी मिली है। पहला फायर स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 8 बजे हुआ। यह हमला ऐसे वक्त में हुआ, जब ऑस्ट्रिया में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लगने जा रहा था। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने कहा है कि हम अपने देश में कठिन वक्त का सामना कर रहे हैं। हमारी पुलिस इस घिनौने आतंकी हमले की साजिश रचने वालों को ढूंढ निकालेगी। आतंक के आगे हम कभी नहीं झुकेंगे और हम हर तरीके से यह लड़ाई लड़ेंगे। चांसलर का कहना है कि जहां एक ओर पुलिस एंटी टेरर ऑपरेशन में जुटी है, वहीं दूसरी ओर सेना को अहम इमारतों की सुरक्षा में लगाया गया है। विएना में लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों से दूर रहने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है। उधर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। जॉनसन ने ट्वीट करते हुए कहा कि वियना में हुए भयावह आतंकी हमले से मैं स्तब्ध हूं। यूके के लोग ऑस्ट्रिया के साथ आतंक के खिलाफ इस जंग में साथ खड़े हैं।


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कोरोना वायरस संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आए WHO चीफ, क्वारंटीन

जिनेवा/लंदन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ने कहा है कि कोविड-19 से संक्रमित हुए एक व्यक्ति के संपर्क में आने के चलते वह पृथक-वास में रहेंगे। ने रविवार देर शाम को ट्वीट किया कि वह ‘ठीक हैं और उनमें कोई लक्षण भी नहीं है’ लेकिन ‘डब्ल्यूएचओ के नियमों के अनुसार वह आगामी दिनों में स्वयं को पृथक-वास में रखेंगे और घर से ही काम करेंगे।’ डब्ल्यूएचओ महानिदेशक कोरोना वायरस महामारी के विरूद्ध वैश्विक लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर हैं। जॉस हॉपकिंस विश्वविद्यालय के अनुसार इस महामारी से 4.65 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 12 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वैसे डब्ल्यूएचओ प्रमुख के ट्वीट में यह नहीं बताया गया है कि उनके संपर्क वाले लोगों में कौन संक्रमित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी जिनेवा में है जहां मामले बढ़ रहे है और इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए रविवार को कड़ी पाबंदियों की घोषणा की गयी थी। ब्रिटेन के प्रिंस विलियम को अप्रैल में हुआ था कोरोना ब्रिटेन के प्रिंस विलियम को भी कोरोना वायरस हुआ था और यह प्रत्यक्ष रूप से वही वक्त था जब उनके पिता प्रिंस चार्ल्स में इस वर्ष की शुरुआत में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। बीबीसी की एक खबर में यह जानकारी दी गई है। खबर में महल के सूत्रों और समाचार पत्र ‘द सन’ की एक खबर का हवाला दिया गया कि प्रिंस विलियम ने खुद के संक्रमित होने की जानकारी इस लिए नहीं दी थी क्योंकि वह किसी को भी परेशान नहीं करना चाहते थे। किंग्सटन पैलेस ने इस संबंध में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया लेकिन खबर से इनकार नहीं किया। समाचार पत्र ने अपनी खबर में कहा कि विलियम का इलाज महल के चिकित्सकों ने ही किया और इसके लिए सरकारी दिशा निर्देशों का पालन किया गया। गौरतलब है कि प्रिंस चार्ल्स में मार्च में कोरोना वायरस संक्रमण के हल्के लक्षण थे। संक्रमण मुक्त होने के बाद जनता से पहली मुलाकात में उन्होंने कहा था कि जब वह बीमार थे तो उनकी सूंघने की शक्ति समाप्त हो गई थी और उन्हें किसी चीज का स्वाद भी नहीं आता था।


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चीन की मंशा पर जर्मनी को भी संदेह, कहा-यूं सचाई से आंखें नहीं चुरा सकते

बर्लिन हिंद-प्रशांत इलाके में चीनी ड्रैगन पर नकेल कसने के लिए जर्मनी ने भी कमर कस ली है। जर्मन सेना के अधिकारी अब ऑस्‍ट्रेलिया की नौसेना के साथ तैनात होंगे और एक जर्मन नेवी का युद्धपोत हिंद महासागर में गश्‍त लगाएगा। इस कदम के जरिए जर्मनी इंडो-पैसफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करने पर काम करेगा। जर्मनी की विदेश मंत्री अन्‍नग्रेट क्रांप ने कहा कि दुनिया की भलाई के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है। अन्‍नग्रेट ने कहा, 'हमारा मानना है कि जर्मनी को इस क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ानी होगी।' AKK के नाम से मशहूर अन्‍नग्रेट ने कहा क‍ि यूरोप चीन के आर्थिक अजेंडे और भूराजनीतिक रणनीति से पिछले साल पूरी तरह से वाफिक हो गया है। चीन जर्मनी का एक महत्‍वपूर्ण व्‍यापारिक साझीदार है और हमारा चीन के साथ मज‍बूत आर्थिक संबंध है जो दोनों ही देशों के हित में है।' चीन के खिलाफ दुनिया में कई मोर्चे खुले जर्मन रक्षा मंत्री ने कहा कि इसी समय हम असमान निवेश शर्तों, बौद्धिक संपदा अधिकार का आक्रामक स्‍वायत्‍तीकरण आदि से हम आंखें नहीं चुरा सकते हैं। बता दें कि अन्‍नग्रेट को एक समय में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल का उत्‍तराधिकारी माना जाता था। हालांकि उन्‍होंने ऐलान किया है कि वह वर्ष 2021 में चुनाव नहीं लड़ेंगी। साथ ही पार्टी का नेतृत्‍व भी छोड़ेंगी। अन्‍नग्रेट पहली ऐसी जर्मन नेता हैं जिन्‍होंने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि जर्मनी के 5G नेटवर्क से चीन की कंपनी हुवावे को अलग रखा जाएगा। उन्‍होंने कहा कि यूरोप के देश उसी तकनीक को अपनाएंगे जिस पर वे भरोसा करते हैं। ऑस्‍ट्रेलिया पहला ऐसा पश्चिमी देश था जिसने राष्‍ट्रीय सुरक्षा चिंता के आधार पर वर्ष 2018 में हुवावे पर बैन लगाया था। इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाया।


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छत्तीसगढ़ टीम ने जीता 14 स्वर्ण पदक 5 रजत पदक कसया पदक 7 छत्तीसगढ़ टीम 2 विजेता रहा

My Ambikapur News 19 वी राष्टीय मतसोगी प्रतियोगिता चंडीगढ़ पंजाब में छत्तीसगढ़ राज्य टीम ने विजय प्राप्त दूसरे  स्थान पे छत्तीसगढ़ राज्य मतस...

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