अबु धाबी विदेशी निवेश और विशेषज्ञता के तौर पर (UAE) को विकसित करने के लिए राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान ने कई फैसलों का ऐलान किया है। इनमें से कुछ पर्सनल स्टेटस लॉ, फेडरल पीनल कोड और फेडरल पीनल प्रसीजरल कानून में बदलाव शामिल हैं। इनमें से कुछ का सीधा असर प्रवासियों पर होगा। गौरतलब है कि में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। पैतृक संपत्ति के नियम प्रवासियों की वसीयत और जायदाद, शादी और तलाक, यौन प्रताड़ना जैसे 'सम्मान से जुड़े अपराधों' में बदलाव किए गए हैं। पर्सनल स्टेटस कोड और सिविल लॉ के संशोधनों से UAE में रह रहे प्रवासियों को कानून चुनने की आजादी होगी जो उनकी पैतृक संपत्ति पर लागू होगा ताकि विदेशी निवेशकों के वित्तीय हितों को स्थिरता दी जा सके। पैतृक संपत्ति को लेकर मृतक व्यक्ति की नागरिकता के मुताबिक फैसला किया जाएगा। शादी पर लागू नियम पर्सनल स्टेटस कोड के मुताबिक जिस देश में दो लोगों की शादी हुई होगी, वहां के नियम शादी के नियमों के मुताबिक होंगे न कि पति-पत्नी की नागरिकता के मुताबिक। एक और संशोधन के मुताबिक जिस देश में शादी हुई हो, वहां के नियम शादी के कॉन्ट्रैक्ट, तलाक या अलग होने के समझौते के निजी और वित्तीय मामलों पर भी लागू होंगे। 'ऑनर किलिंग' की सजा 1987 के पीनल कोड नंबर 3 के तहत राष्ट्रपति के फैसलों में बदलाव किए गए हैं। उस आर्टिकल को वापस ले लिया गया है जिसमें 'सम्मान के लिए किए गए अपराध' की सजा कम करने का प्रावधान था। नए संशोधन के तहत हर अपराध से हत्या और दूसरे कानूनी आर्टिकल्स की तरह निपटा जाएगा। इसके तहत महिलाओं के अधिकारों और कानून के पालन को सुनिश्चित किया जाएगा। मिलेगी मौत की सजा सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों पर कानून कार्रवाई ऐसे केस में की जाएगी जब पीड़ित की उम्र 14 साल या उससे कम हो या उनकी कम उम्र हो, दिमागी हालत ठीक न हो या वे रिश्तेदार हों या पीड़ित के अभिभावक हो। नाबालिग या मानसिक रूप से विक्षिप्त इंसान के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने पर मौत की सजा दी जाएगी।
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